ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा?उलझी हुई कई रातें तू यूँही सुलझा देती है.उगते सपने कई तू हकीकत में ले आती है,आसमान से तोड़ देती है सितारे अनगिनत ,तोड़ के तू मेरी झोली में जड़ने चली आती है.ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा?प्यार की पवन... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

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[01 Mar 2010 08:59 AM]

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