मेरे बादल

shuruwat मेरी तम्मनाओं से परे ये बादल ,जिन्हें मै रोक नही पाता,यहाँ क्योँ नही बरसते बादल ,ये पूँछ नही पाता.ये भी अटपटे से हैं ,क्या करते हैं मै समझ नही पाता ,कोई तो बूंदों से खेलता रहता है ,और कोई एक बूंद के लिए तरस जाता .बादल ,तुम तो हरा भरा रखते थे ,जीवत रखते... [पूरी पोस्ट]
writer mere shabd
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[11 Feb 2010 09:26 AM]

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