कुमाऊँ और उत्तराखंड की शान - जिल्लिंग - दूसरा दिन
पहला भाग 19 फ़रवरी , २०१०
किसी भी हिल स्टेशन की तरह भीमताल की सुबह भी बेहद हसीन थी। होटल लेक रेसोर्ट की बालकनी से बहार का नज़ारा बेहद खुशनुमा और दिल-ओ-दिमाग को तर-ओ-ताज़ा करने वाला था। धुली हुई और साफ़ सड़क, स्कूल को जाते छोटे बच्चे, उगते हुए सूरज की रौशनी...
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पियूष अग्रवाल
भीमताल
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[25 Feb 2010 09:15 AM]



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