चूल्हे भाड में जाय यह चाहत - चाह के हाथों किसी को सुख नहीं
मेरी सकत गुरू की भगत फूरे मंत्र ईश्वरोवाच .. उधर हमको नींद सताती थी, और की सुनिये । अब तक जो पढ़ा सो यह था कि मेरी सकत गुरू की भगत फूरे मंत्र ईश्वरोवाच पढ के एक छींटा पानी का मिलना था कि छीटों के साथ ही कुँवर उदैभान और उसके माँ बाप तीनों जनें हिरनों...
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डा. अमर कुमार
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[25 Feb 2010 13:21 PM]



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