स्मृति गीत: हर दिन पिता याद आते हैं --संजीव 'सलिल'
संजीव 'सलिल'*जान रहे हम अब न मिलेंगे.यादों में आ, गले लगेंगे.आँख खुलेगी तो उदास हो-हम अपने ही हाथ मलेंगे.पर मिथ्या सपने भाते हैं.हर दिन पिता याद आते हैं...*लाड, डांट, झिडकी, समझाइश.कर न सकूँ इनकी पैमाइश.ले पहचान गैर-अपनों को-कर न दर्द की कभी नुमाइश.अब न...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[11 Feb 2010 12:36 PM]



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