शरणागत वत्सल थे महर्षि सौभरि
ऋषियों को वेदों ने प्रजापति के अंग-भूत की संज्ञा दी है; उन्हें जन्म से ही सच्चे धर्म का ज्ञान था एवं आचरण भी उसी के अनुरूप होता था। वे त्रिकालदर्शी होते थे। सतयुग के उन्हीं श्रेष्ठ ऋषियों में थे महर्षि सौभरि।ब्रह्मा जी के पौत्र महर्षि घोर के पौत्र ऋषि...
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राहुल पंडित
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[18 Feb 2010 04:31 AM]



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