भूले पन्नो से.
महसूस हो रहे हैं यादे फ़ना के झोके,खुलने लगे हैं मुझपर असरार जिन्दगी के,वारे अलम उठाया रेंज निशात देता,यूँ ही नहीं हैं छाये अंदाज बहसी के.वफ़ा में दिल की सदके जान की नज़रे जफा कर दे,मुहब्बत में ये लाजिम है की जो कुछ हो फ़िदा करदेबहे बहरे फना में जल्द या रब...
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राहुल पंडित
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[22 Feb 2010 10:45 AM]



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