रग-रग हिन्दू मेरा परिचय
मै शंकर का वह क्रोधानल,कर सकता जगती क्षार-क्षार.मै डमरू की वह प्रिय ध्वनि हूँ,जिसमे नाचता भिसन संहार.रणचंडी की अतृप्त प्यास,मै दुर्गा का उन्मत्त हास.मै यम की प्रलयंकर पुकार,जलते मरघट का धुआधार.फिर अंतरतम की ज्वाला से,जगती में आग लगा दूं मै.गर धधक उठे...
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राहुल पंडित
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[22 Feb 2010 11:22 AM]



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