वक्त की डोर

JHAROKHA कहते हैं जो रात गयी सो बात गयी ऐसा भी कभी ही होता है पर बात जो दिल में जाये उतर क्या वो लाख भुलाये भी भूलता है। ये तो एक बहाना है अपने मन को बहलाने का वरना इतना आसान नहीं जो धोखे पे खाता धोखा है क्या दिल उसका इसे मानता है। है वक्त बड़ा मरहम सबसे जो बड़े... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

कविता

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[19 Feb 2010 11:16 AM]

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