पैगाम

JHAROKHA ख्वाबों में ही छलनी हो, गया जिगर जिसका वही तो जिगर हमारा है, वहीं तो जिकर हमारा है। खयालों के धागे बुनते बुनते, कुछ बिगड़े कुछ सूत बने। वही तो फ़िर उम्मीद बने, वही तो फ़िर सहारा है। सूरज चांद बादल सारे, झिलमिल करते ये तारे वही धरती ,नील गगन हमारा, वही तो... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

गजल

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[25 Feb 2010 10:47 AM]

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