फ़ागुन रीता जाये ना
दिन फ़ागुनी रंग बासन्ती मौसम भीना भीना सा इंतजार तेरा करते करते बीते सावन का महीना ना॥ मौसम ने ली है अंगड़ाई अब तो प्रियतम आ जाना तेरे बिन हर पल अब तो मेरे जी को भाये ना।… संग सहेलियां इतराती हौले हौले फ़ागुन गा्यें ना हंसी ठिठोली मुझसे करतीं जो मेरे जी...
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JHAROKHA
फ़ागुन
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[28 Feb 2010 20:25 PM]



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