गोरी गोरी कोयल
कोयल ने जब शीशा देखाहो गई वह तो बहुत उदासगोरी मैं कैसे बन जाऊंसोच के पहुंची वैद के पास।भालू वैद ने कूट पीस करदे दी ढेरों क्रीम दवायेंफ़ीस दवा की कीमत उसनेवसूले पूरे दो सौ पचास।क्रीम दवायें लगा लगा करसुन्दर पंख झड़े कोयल केतौबा की उसने शीशे सेफ़िर से...
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हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
झूमो नाचो गाओ
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[07 Mar 2010 12:12 PM]



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