होली की ठिठोली

कलमबंद होली है…भाई होली है..बुरा न मानो होली है। इन शब्दों से जुड़ी कई यादें है जिनको याद करके बहुत भावुक महसूस करता हूं। होली एक अकेला ऐसा त्यौहार है जिसमें पाकर खुद को बहुत खुश महसूस करता हूं। होली में कोई बंदिश नहीं रहती है, धूप में सूख रहे पापड़, चिप्स हो... [पूरी पोस्ट]
writer शशांक शुक्ला

प्योहार

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[28 Feb 2010 08:47 AM]

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