सरूर ....!!!

के.सी.वर्मा हुई सुबह तो उनकी आँखों में इक सरूर था ,आँखों की लाली थी कह रही थी ,कुछ हुआ जरूर था ।उलझी हुई लटों में, कुछ प्रश्न भी थे अनसुलझे ,न लटें ही सुलझी ? कुछ प्रश्न और भी उलझे ।उल्टा प्रश्न आँखों ने किया जरूर था ........ तन की उमंग मन की तरंग होठों पर थी आयी... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश वर्मा
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[23 Feb 2010 10:39 AM]

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