जो जीते थे मेरे लिये वो...!!!

के.सी.वर्मा जो जीते थे मेरे लिये वो ,अजनबी कैसे हो गये ,बड़ी जतन से संजोये रिश्ते ,ये कैसे ऐसे हो गये । न आवाज आयी टूटने की ,न लगा कुछ है गिरा,फिर ये दिलों के टुकड़े तार-तार कैसे हो गये । शिकवों की सिसकियाँ थी ,सुनी शायद किसी ने ,उन छलकती आँखों के आंसू ,इतने बे-जार... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश वर्मा

आँखों

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[20 Feb 2010 09:31 AM]

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