उल्फत नही थी दिल में...!!!
उल्फत नही थी दिल में ,तो दिल को रुलाया कैसे ? मंजिल तलक कसमों को, यूँ ही तुमने भुलाया कैसे ? गर पता होता दिल को, तेरी इस बात का,क्या दर्द भरा सिला दिया ,मेरे जज्बात का । पहले ही मोड़ लेते अपने ,अरमानों की नाव को , गर न दिलाया होता यकीं , प्यार कि बरसात...
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कमलेश वर्मा
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[23 Feb 2010 03:41 AM]



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