जिन्दगी -सफरनामा ..
मुश्किलों से निकला बचपन ,कल छोड़ ,वर्तमान का नही था पता ,..रिश्तों ने दिए सहाराजीवन बेल को निखारा ...समझौते किये अहसानों के बदले ॥?क्यूँकर मंजिल पानी थी ....कितनी बार हारी हिम्मत ...पर फिर हिम्मत ने सम्भाला ....मंजिल मिली कुछ अच्छे सच्चे रिश्तों से...
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कमलेश वर्मा
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[23 Feb 2010 07:33 AM]



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