हसरत -ए-दिल ...!!
तेरी हसरत थी जो दिल को ,वह खत्म हो गयी ,अब वादे-वफा निभानी बस रस्म हो गयी । जी जाते गर तूने, रस्मे -उल्फत निभायी होती , बर्बादी की जगह, जिन्दगी की राह दिखाई होती । कहाँ ? देखे थे इन आँखों ने बहारों के सपने ,तपती रेत के सहरा में फुहारों के सपने । उम्मीदों...
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कमलेश वर्मा
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[25 Feb 2010 13:13 PM]



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