वक्त करवट लेता गया

चिंतन मेरे मन का वक्त करवट लेता गयाहर बीते पलो को समेटने लगासंकुचित मन से वक्त को देखापीड़ा का अहसास उसमें पायादुखते और सुलगते घावों कोअसहाय सा इस दौर में पायासमझ न सका वक्त का इशाराअपने को सवालों से मजबूर पायाजीने कि चाह मे उठते गिरते स्वरपल - पल वेदना के चुभते खंजरसुख... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[19 Feb 2010 11:39 AM]

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