मैं जिन्दा रहते हुए भी मुर्दों जैसा जी रहा हूँ

सीधी बात लोग कहते है मैं बहुत भावुक इंसान हूँ. मुझे भी ऐसा ही लगता था पर कुछ दिनों पहले तक ही. लोगों को पीड़ा में देखकर मेरा ह्रदय भी पीड़ित हो जाया करता था. किसी के भी दुःख में मैं भी दुखी हो जाया करता था, लोगों की ख़ुशी में मैं भी हँस लिया करता था. बातें मेरे दिल... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक प्रसाद 'अवि'

ख़ामोशी

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[04 Mar 2010 10:51 AM]

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