जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ
जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ, मेरा दिल भी रोने लगता है. तड़प हो उठता है मेरा मन. जी करता है मैं भी जार-जार रोऊँ...आज भी मैंने एक अपने बहुत अजीज को रोते हुए देखा. हुआ कुछ यों की दिल को उनके बहुत ठेष लगी, आँखों में दो बूँद उतर आये उनकी. मेरे उस...
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अभिषेक प्रसाद 'अवि'
ख़ामोशी
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[06 Mar 2010 11:15 AM]



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