जैसी करनी!!वैसी भरनी!!

रज़िया मिर्ज़ा कहीं एक गाँव में एक आदमी रहता था। लोग कहते थे कि वो कहीं ओर से आ बसा था। पर उसने अपने आपको ये गांव काठेकेदार बना रख्खा था।गांव में आनेवाला हर नया शख़्स उसके पैर छूए बगैर जैसे यहाँ बस नहिं सकता था। ठेलेवाले हो याकोई ढाबे वाले। सब पर एक ही नियम रहता था। अब... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
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[12 Feb 2010 13:31 PM]

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