पस्ती -ऐ -इंसां

हया शर्मिंदा हूँ ,ग़मज़दा भी हूँ ,अफ़सोस और पछतावा भी है की इतने लम्बे अरसे के बाद ब्लॉग को छुआ है .कभी कभी इंसान चाहकर भी अपना मन पसंद काम नहीं कर पाता .क्या कहूं ,वक्त नहीं था ?किसी के पास नहीं है आज के दौर में, पर हकीकत येही है .प्रोग्राम्स और शूटिंग ने... [पूरी पोस्ट]
writer लता 'हया'
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[23 Feb 2010 06:51 AM]

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