होली और महिला दिवस पर मेरे ज़ज्बात

हया करूँ क्या खेल कर होली ? दिलों में फ़र्क़ हो तो फिर करूँ क्या खेल कर होलीसजा दो प्यार के रंगों से हिन्दुस्तान की डोली जलादो होलिका ज़ुल्मो-सितम ,नफ़रत की फिर देखो ख़ुशी के रंग से भर जायेगी हर शख्स की झोली सात शेर ,सात रंग [१] अना का रंग ; मैं जो तलवार उठा... [पूरी पोस्ट]
writer लता 'हया'
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[04 Mar 2010 06:25 AM]

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