टुन्न होकर गरियाने का पर्व

व्यंग्य व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट लो फिर चन्दा खाने का त्यौहार आ गया। जी हाँ, होली को हमने हमेशा सामूहिक रूप से चन्दा खाने के त्यौहार के रूप में ही देखा है। बचपन में मोहल्ले के सारे चन्दा खाऊ इकट्ठा होकर घर-घर जाकर खाने लायक चन्दा इकट्ठा करते और फिर बाकायदा बजट... [पूरी पोस्ट]
writer vyangya
views
5
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[02 Mar 2010 10:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix