कल मानव की तैयारी(१४११)
है फिक्र किसकोहै फुरसत किसे कौन मिट गयाकौन मिट रहानहीं सरोकारकिसी बात सेसिवा खुद केहै चाहता कोई किसेहर आदमी बस जी रहास्वार्थ-निहित जिंदगीचाहता हर-पल यहीसब करें उसकी बंदगीकल मिटी इंसानियतआज बाघ की बारी हैमिट रहा आज बाघ तोकल मानव की तैयारी हैपर,फर्क क्या...
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दिनेश शर्मा
अमन सन्देश
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[25 Feb 2010 18:37 PM]



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