जनता या जमूरा?
किसी को अपनीफिल्म चलानी है,पार्टियों को राजनीति करनी हैचैनलों को मसाला कूटना हैऔर आपको?आप तो ज़मूरे हैं।इशारों पर नाचने वाले ज़मूरे,इनके धंधों मेंबेमोल बिकने वाले ज़मूरे। क्या ज़मुरुओं की कोई औकात होती है?मुम्बई पिछले कुछ दिनो से हैरान है। आप जानते हैं क्यों...
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अमिताभ श्रीवास्तव
व्यथा
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[10 Feb 2010 14:39 PM]



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