महिला दिवस पर
नारी जीवन आज तुम्हारे यही मायने
पंख लगाकर खुले गगन में उड़ी उड़ानें आसमान हो, अंतरिक्ष या पार क्षितिज के
अब सब लगते घर जैसे जाने पहचाने
नारी हो नर से आगे या नर नारी से आगे
कोई फरक नहीं पड़ता जो टूट न पायें धागे
आसमान विस्तृत सागर सी जब सोच हमारी होगी
तब...
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satyanshu
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[08 Mar 2010 05:10 AM]



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