अपनी परम्पराओं की ओर लौटना होगा
दहेज एक सामाजिक बुराई है। सिर्फ कानून के माध्यम से इसे नहीं रोका जा सकता है। कुछ राज्यों में इसका बड़ा भयावना चेहरा देखने को मिल रहा है। यहां लड़के का पालन-पोषण, उसकी शिक्षा-दिक्षा को एक इनवेस्टमेंट के रूप में देखा जाता है। विवाह के अवसर पर इसे सूद समेट...
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pratibha
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[19 Feb 2010 02:50 AM]



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