स्मृति गीत: हर दिन पिता याद आते हैं... --संजीव 'सलिल'
स्मृति गीत:हर दिन पिता याद आते हैं...संजीव 'सलिल' *जान रहे हम अब न मिलेंगे. यादों में आ, गले लगेंगे.आँख खुलेगी तो उदास हो-हम अपने ही हाथ मलेंगे. पर मिथ्या सपने भाते हैं.हर दिन पिता याद आते हैं...*लाड, डांट, झिडकी, समझाइश.कर न सकूँ इनकी पैमाइश. ले पहचान...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[11 Feb 2010 12:23 PM]



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