उड़ गया अचानक ले भूधर

काव्य संग्रह आशाओं के दीपक की, जब बत्ती बुझकर राख हुई,जब तेल रहा न बाती, तब छाती घुटकर राख हुई |मेरे अपने अहसासों की, जब मिटटी बनकर ख़ाक हुई,जब डूब गयी आँखें आँखों में, तो बातें भी नापाक हुई |उड़ गया अचानक ले भूधर (तूफ़ान), मेरे सपनो की बुनियादें,दे गया अनोखा पागलपन ,... [पूरी पोस्ट]
writer रवि शंकर शर्मा
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[10 Feb 2010 02:42 AM]

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