इस क़दर टूटा हूँ कि रोना चाहता हूँ....: महफूज़

मेरी रचनाएँ कभी-कभी मन बहुत उदास होता है. कारण ख़ुद को भी नहीं पता होता. हम रोना तो चाहते हैं, लेकिन आंसू नहीं निकलते, मंज़िल सामने तो होती है लेकिन रास्तों का पता नहीं होता. विचारों का द्वंद्व  दिल-ओ-दिमाग़ में चलता रहता है लेकिन विचारों में ठहराव... [पूरी पोस्ट]
writer महफूज़ अली
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[05 Mar 2010 10:14 AM]

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