तुम्हारा नाम
फिर बिछलती साँझ नेभरमा दियालेकर तुम्हारा नाम ।बहककर है आ गयामेरे दुआरेअन्य बागों से मधुर मलयी पवनबिछ रहे पथ मेंअतुल विश्वास लेकरकिस अदेखे ताल से येभीगकर आये नयन ।हर सुलगते शब्द नेआकर किया हैफिर मुझे बदनाम ।फिर बिछलती साँझ नेभरमा दियालेकर तुम्हारा नाम...
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सुरेश पण्डा
कविता
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[11 Oct 2009 07:06 AM]



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