नारी का शील उघड़ने लगे ,लज्जा वसन छूटने और लुटने लगे तो सांस्कृतिक प्रदुषण बढ़ता है---------------मिथिलेश दुबे

Dubey नारी यदि संस्कृति संरक्षण करें तो सांस्कृतिक परिदृश्य में सुखद परिवर्तन निश्चित है । वैसे भी संस्कृति का नारी.के साथ प्रगाढ रिश्ता हैं। नारी के संस्कार, शील व लज्जा से किसी भी देश की सांस्कृतिक पवित्रता बढ़ती है , लेकिन यदि इसके विपरीत होने लगे , नारी का... [पूरी पोस्ट]
writer Mithilesh dubey

नारी दुबे लेख लज्जा

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[04 Mar 2010 08:47 AM]

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