पतंजलि योग दर्शन-धर्म मार्ग का विचार करे वही धर्मज्ञ (dharama marg ka vichar-patanjali yog darshan)
शान्तोदिताव्यपदेश्यधर्मानुपाती धर्मी।हिन्दी में भावार्थ-जो मनुष्य अतीत, वर्तमान और भविष्य का विचार करते हुए धर्म में विद्यमान होता है वही धर्मज्ञ है। क्रमान्यत्वं परिणामन्यत्वे हेतुः।हिन्दी में भावार्थ-परिणाम की भिन्नता में क्रम की भिन्नता कारण...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[11 Feb 2010 23:37 PM]



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