विदुर दर्शन-दोष दृष्टि रहित होने पर ही आनंद की प्राप्ति
प्रज्ञामेवागमयति यः प्राज्ञेभ्यःस पण्डितः।प्राज्ञो ह्यवापप्य धर्मार्थौं शक्नोति सुखमेधितम्।।हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर जी के मतानुसार जो मनुष्य बुद्धिमानों की संगत कर सद्बुद्धि प्राप्त करता है वही पण्डित है। बुद्धिमान पुरुष ही धर्म और अर्थ को...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[20 Feb 2010 23:14 PM]



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