रहीम संदेश-स्वार्थ के अनुसार लोगों का दृष्टिकोण बदलता है (svarth aur drishtikon-rahim sandesh)

दीपक भारतदीप की हिंदी एक्सप्रेस पत्रिका स्वारथ रचत रहीम सब, औगुनहूं जग मांहिबड़े बड़े बैठे लखौ, पथ रथ कूबर छांहि।।कविवर रहीम कहते हैं कि लोग अपने स्वार्थ के अनुसार दूसरे में गुण और अवगुण ढूंढते रहते हैं। जो कभी अपना स्वार्थ साधने के लिये रथ के हरसो की टेढ़ी मेढ़ी छाया को अशुभ कहते हैं वह लोग उसकी... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

adhaytma

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[25 Feb 2010 22:54 PM]

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