मेरी कहानियां
मुझे ,उस औरत की शक्ल ,बार बार याद आ रही थी . उसकी साड़ी का रंग मेरी आखों में कौंध जा रहा था ।उसका चेहरा मोम की मूरत जैसा था .....एक डर भी मुझसे चिपका हुआ था ...कहीं वह भूत तो नहीं था । मैं, मनको समझाता हुआ सफ़र कर रहा था ......बस वेल्वाई में रुकी सभी लोग...
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भंगार
ससुराल
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[11 Feb 2010 02:05 AM]



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