दो होली की कवितायें
दो होली की कवितायें1- उन पर रंग लगाऊं कैसेजिन मुख कालिख मली हुयी हैउन पर रंग लगाऊं कैसे?उजली खादी वाले निकलेचोर, उचक्के, पापी, बगुलेभगवा भेष किया है धारणउसमें छुपे हुये हैं रावणजनता बहुत सरल सीता सीनिर्वासित होकर वनवासीलव कुश भक्त ''माइकिल'' के...
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वीरेन्द्र जैन
राजनीतिक व्यंग्य त्योहार
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[21 Feb 2010 11:45 AM]



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