व्य्ंग्यजल-न कहीं है उमंग होली में

virendra jain ke nashtar व्यंगजलहोली में------------यहाँ वहाँ न कहीं है उमंग होली मेंसभी लगाये हैं बाहर से रंग होली मेंउन्हीं के दिल में एक वायलिन सी बजती हैबजा रहे हैं जो बैठे मृदंग होली मेंमिले न मन, न मिली आत्मा, न इच्छाएंशारीर नाच रहे संग-संग होली मेंरहा जो ईद में, दीवाली... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

व्यंग्य

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[25 Feb 2010 03:23 AM]

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