एक व्यंग्य :हरहुआ और टी० वी०
हरहुआ और टी०वी० किसी गाँव में, एक ज़मींदार साहब रहते थे।काफी लम्बी-चौड़ी ज़मींदारी थी।परन्तु जब से ज़मींदारी उन्मूलन अभियान शुरु हुआ तो उनकी ज़मींदारी ख़त्म हो गई और वह "बाबू-साहब" बन गए।ज़मींदारी तो ख़त्म हो गई परन्तु उनकी "कोठी" का "कोठापन" खत्म नहीं...
[पूरी पोस्ट]
आनन्द पाठक
6
0
0
0
0
[21 Feb 2010 09:24 AM]



Shuffle








