हँसी ने मित्र बनाया और हँसी ही गायब हो गयी

Dr. Smt. ajit gupta उसकी खनखनाती हँसी ऐसे लग रही थी जैसे झरना कलकल बह रहा हो, या सुदूर पहाड़ों के मध्‍य कहीं से मन्दिर की घण्टियां बज उठी हों। मैं उसकी तरफ खिचने लगी। मन कर रहा था कि यह ऐसी ही हँसती रहे और मैं उस निर्मल हँसी का पान करती रहूँ। मैंने अपनी दोस्‍ती का हाथ... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Smt. ajit gupta

समाजिक सरोकार

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[04 Mar 2010 02:29 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix