रोना भी क्या एक कला है
" रोना भी क्या एक कला है "रोना क्यों कर दुर्बलता है ?यह तो नयनों की भाषा है ।सुख देखे तो छलक जाता है ।दुःख में फिर भी सहज आता है ।लाख संभालो , न तब रुकता है ।न निकट हो कोई आहत करता है ।उमड़ घुमड़ जो बस जाता है ,श्रांत ह्रदय वह कर देता है ।रोना भी क्या एक...
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Kusum Thakur
कविता
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[19 Feb 2010 08:12 AM]



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