होली
( कई दिनों से अस्वस्थता के कारण मैं कुछ नहीं लिख पाई हूँ, न ही पढ़ पाई हूँ, पर आज बिना लिखे न रह पाई और कुछ पंक्तियाँ लिख ही डाली )" होली "दिन हो होली या कि दिवाली ,रहता था न दिल भी खाली ।चटक रंग तो बसत ह्रदय में ,उसे उतारूँ कैसे नयनन में ।देखि ज्यों मैं...
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Kusum Thakur
कविता
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[28 Feb 2010 05:51 AM]



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