उनको सालता है जीत का गम!

पुरवाई गम और खुशी, यह दो शब्द क्रमशः हार और जीत के साथ जुड़े हैं। लेकिन क्या किसी को अपनी जीत का गम भी हो सकता है? जी हां, ऐसा भी होता है जब किसी को अपनी जीत का गम कोई 38 साल बाद भी साल रहा हो। ऐसे ही एक सज्जन का नाम है शिवपद भट्टाचार्य । पश्चिम बंगाल के... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर मणि तिवारी

राजनीति

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[17 Feb 2010 12:43 PM]

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