कुछ यादें इश्क की गलियों से

थोड़ी सी ज़मीन, थोड़ा सा आसमान क्या अब भी कोई आता है तुमसे मिलने ऑफिस से आते वक़्त,क्या ट्रेन में बैठते वक़्त अब भी क्या तुम्हे मेरे आने का इंतज़ार रहता हैक्या कभी तुम भूल जाते हो कि अब मैं उस शहर में नहीं हूँ और तुम्हे रहती है जल्दी घर पहुचने की,क्या अब भी तुम घर पहुच कर खोल कर बैठ... [पूरी पोस्ट]
writer Surbhi
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[15 Feb 2010 13:34 PM]

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