रात आधी खींचकर मेरी हथेली एक उँगली से लिखा था 'प्यार’ तुमने
आज बहुत कुछ लिखने का मन है..पर मेरे विचारों मेरी भावनाओ को शब्दों में पिरो पाना बहुत मुश्किल हो रहा है......बार बार कुछ लिखती हूँ कुछ मिटाती हूँ...अचानक से याद आती है मुझे हरिवंशराय बच्चनजी की वो कविता जो मैंने न जाने कितने बरसों पहले पढ़ी थी पर आज पहली...
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Surbhi
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[26 Feb 2010 13:54 PM]



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