अब मैं कोई भी रंग पहनूँ हूँ तो मै मनुष्य ही ना

कवि कोकास रंगों पर लोगों की प्रतिक्रिया को लेकर मुझे पहली बार गुस्सा तब आया जब एक मित्र ने मेरी हरी कमीज़ देखकर मुँह बिचकाया .." हरी कमीज़ ..क्यों धर्म बदल लिया है क्या ? दूसरी बार गुस्सा तब आया जब एक मित्र ने भगवे रंग की कमीज़ को देख कर कहा ..क्यों परिषद के सदस्य बन... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

कविता

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[27 Feb 2010 22:59 PM]

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