बेटी की बिदाई

क्षितिज 1बेटी, तुझे घर से बिदा किया थालेकिन एक सशक्त हाथों में सौंप कर।उस समय तूने पूछा था,वहां कौन है मेरा?न बन्धु न बान्धवीन तुम न पिता,न भाई न बहन।मैने कहा था सब कुछ वहीं है,समझाया था, आंसू पोछे थे तेरे।तेरी गोद भर कर,नन्हां सा टीका लगा कर,कहा था, अब वही है... [पूरी पोस्ट]
writer उषा वर्मा
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[27 Feb 2010 10:35 AM]

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