शब्द
शब्द ,तुम सूर्य के वंशधरनचिकेता की अग्नि तुम्हीं,तुम्हीं मेरी आकांक्षा के आकाश।शब्द तुम कस्तूरी का सुवासपागस करती रही सदाजीवन भर जंगल जंगलरही भटकती मैं अभिशापितसूर्य तुम ज्योति-पुंज के हस्ताक्षरमेरे जीवन का उल्लासठगा सा खोया सोया था चुपचापजान न पाईवह सब...
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उषा वर्मा
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[27 Feb 2010 10:21 AM]



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